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तरावीह की नमाज कैसे पढे How to read Taraweeh prayers

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प्रतीकात्मक चित्र      प्रिय पाठक हमने आपको पहले ब्लॉग पोस्ट में बताया था, के मुस्लीम समुदाय रमजान महीने में रोजा क्युं और कैसे रखते है| और हमने आपसे रमजान महीने में होने वाली अनेक गतीविधियो के बारे में बारिक से बारिक जानकारी दी थी| आप पाठको को मेरा वह ब्लॉग पोस्ट बहोत पसंद आया, यह आपने हमे ई-मेल भेज कर बताया और हमारी दिल कि गहराई से सराहना कि| हम भी आपके सराहने के लिये दिल कि गेहराई से शुक्रिया अदा करते है और धन्यवाद देते है| आपका हमारे ब्लॉग पोस्ट को पढना और हमे सराहना हि हमारे हौसले और उत्साह को और अधिक बढाता है| आपके सराहने से हमे नये-नये पोस्ट लिखने कि स्पुर्थी और उर्जा मिलती है|      तो हम आप सभी पाठकों को रमजान महीने में मुस्लीम समाज कि विशेष प्रार्थना याने नमाज-ए-तरावीह याने तरावीह कि नमाज क्या होती है? तरावीह कि नमाज कैसे अदा करते है| उसके बारे में सिधे और सरल भाषा में बताने का प्रयास करेगे| उम्मीद है, के आपको मेरा यह प्रयास बहोत पसंद आयेगा| सो गाईस चलते है, हम अपने मुख्य विषय कि ओर| तरावीह कि नमाज कैसी होती है ?    ...

कोरोना संकट के चलते मजदूर कैसे बना मजबुर ? How did the laborer become helpless due to Corona crisis?

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        प्रिय पाठक आप सभी जानते है, के पिछले साल दबे पांव चीन से आये कोरोना वायरस ने पुरे भारतवर्ष में आतंक मचा दिया था|     मार्च 2020 में भारतवर्ष में प्रवेश कर लाखो मनुष्य जीवन को बाधा पहोंचाते हुवे कोरोना वायरस ने हजारों लोगो को मौत के घाट उतार  दिया था| कोरोना वायरस के बढते आतंक को रोकने के लिये केंद्र  सरकार द्वारा संपुर्ण देश में तालाबंदी याने LOCKDOWN लगाया गया था|     लॉकडाऊन से पहले भारत सरकार ने जनता कर्फ्यु का एलान किया था| लेकीन फ़िर अपना सख्त रुख करते हुवे सरकार ने पुरे भारतवर्ष में  संपुर्ण लॉकडाऊन लगाया था|     कोरोना वायरस के बढते आतंक को रोकना है, तो लॉकडाऊन  लगाना ही पढेगा ऐसा भारत सरकार कि ओर से दो टुक कहा गया था| क्योंकी कि बाजारे, कॉलेज, स्कुल, गार्डन,शादी-समारोह,सामाजिक कार्यक्रम, हॉटेल और मॉल में लोगो के इकठ्ठा होने से COVID-19 का कोहराम बढने कि संभावना बहोत थी| लॉकडाऊन के चलते कारखानो पर भी ताला     देखते ही देखते भारतवर्ष में कडे लॉकडाऊन के तहत संपुर्ण ताल...

रमजान में सहर और इफ्तार कैसे करते है How to do Suhoor and Iftar in Ramadan

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प्रतीकात्मक चित्र      प्रिय पाठक मेरा हमेशा प्रयास रहेता है, के आप सभी पाठको कों परोसने के लिये कुछ नया दिया जाये| ताके आप के मनोरंजन के साथ-साथ आपको हर विषय में घर बैठे महत्वपूर्ण जानकारी भी मील सके| जो पाठक हर विषय में जानकारी हासील करने के लिये रुची रखते है, उन सभी पाठको को मैं आज रमजान महिना और रोजा इस विषय के साथ-साथ रमजान में रोजा रखने के लिये किये जाने वाले सहर और रोजा समापन याने इफ्तार कि बारिकी से जानकारी देने का प्रयास कर रहा हुं, उम्मीद है के आपको मेरा यह ब्लॉग आप सभी पाठकों को बहोत पसंद आयेगा| रमजान में सहर का खाना   प्रतीकात्मक चित्र       रमजान में सहर उसे कहा जाता है| जो रोजा रखने के लिये सुबह तडके तीन बजे से लेकर सहर के आखरी समय याने सुबह 3:00 बजे से लेकर सुबह 4:40 बजे तक होता है| यह समय देश के विभीन्न राज्यो के शहर के हिसाब से 5 से 10 मिनट आगे पीछे होता है|      उस समय खाना खाना सुन्नत है और सुन्नत वह है, जिसे मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम ने किया हो, याने उनके तरीखे पे चलने को सुन्नत तरीका कहते है| सहर में ...

रमजान और मासुम बच्चों का रोजा Ramadan and the fasting of innocent children

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प्रतीकात्मक चित्र       रमजान के रोजे अल्लाह पाक ने उस हर शख्स याने व्यक्ती पर फर्ज किया है, जिसने कलमा तय्यबा पढा हो| और एक अल्लाह होने कि गवाही दि हो, याने एकेश्वर पर विश्वास किया है| रमजान के रोजे फ़र्ज है, इसलिये रोजे नही रखने कि इजाजत किसी भी शख्स को नही| याने फ़र्ज रोजे कि माफी नही|       अलबत्ता जो भी व्यक्ती बिमार है, या फ़िर उस व्यक्ती में रोजा रखने कि जीसमानी याने शारीरिक शक्ती ना हो तो या फ़िर कोई शरई उजर हो तो अलग बात है| मासुम बच्चों का रोजा         रोजा फर्ज नही होने बावजुद भी मुस्लिम समुदाय के मासुम बच्चों में रोजा रखने कि गजब कि चाहत दिखाई देती है| यह उन मासुम और नन्हे बच्चों के उपर किया गया संस्कार कहे, या फ़िर उनका शौख| रोजा रखने कि जिद्द और दिल से शौख के कारन मासुम और नन्हे बच्चे अपने जिंदगी का पहला रोजा रखते है|        मासुम बच्चे जब रोजा रखने कि इच्छा अपने घर के बडे जिम्मेदार या फ़िर माता-पिता के सामने जताते है तो| बच्चों के मां-बाप उन नन्हे बच्चों को सहर का खाना खा...

रमज़ान महीने में रोज़ा क्यों और कैसे रखते है| Why and how do you fast in Ramadan month?

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  प्रिय पाठकों आप सभी को रमज़ान महीने की हार्दिक शुभकामनाएं। लेखक/संपादक: जर्नलिस्ट मुजीब जमीनदार        मुस्लिम समुदाय में रमज़ान महीने को बहुत बड़ा महत्व है। यह महीना अनेक कारणों से अपने आप में महान है। रमज़ान महीने को अन्य महीनों का सरदार भी कहा जाता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय रोज़े रखतें हैं।रोज़ा रखने को इस महीने में अनन्य साधारण महत्व है।       रमज़ान महीने में रोज़ा रखने के साथ-साथ इस महीने की ख़ास इबादत नमाज़े तराविह है।     पाठकों से मेरा अनुरोध है कि वह मेरा यह ब्लॉग शुरू से अंत तक ज़रूर पढ़ें। थोड़ा भी स्क्रोल ना करें। यह ब्लॉग बहुत अच्छा और जानकारी से भरपूर होने वाला है। तो गाइस चलों शुरू करते हैं , रमज़ान महीने से जुड़ी हर पहलू पर नज़र डालते हैं।         रमजान महीने के स्वागत के लिये जन्नत को ग्यारह महीने पहले से हि सजाया जाता है | जन्नत याने स्वर्ग को चारो ओर से मुश्क कि धुई दी जाती है | रोजेदार के रोजे , नमाज और तिलावत में कोई खलल याने कोई रुकावट ना हो , इसलिये शैतान को आग कि जन्जीरों में...